Thursday, January 17, 2013

क्षणिकाएं- 2




अहम्

अक्सर देखा है रिश्तों को
पहल के दायरे में -
उलझते हुए -
वादे....
दावे....
रिश्तों की अहमियत.....
प्रघाड़ता.....
सब - दायरे के बाहर
विस्थापित से  -
सर झुकाए खड़े रहते हैं
और भीतर-
रहता है साम्राज्य
'अहम्' का !

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सेंध

आओ मिलकर -
अहम् के दायरे में सेंध लगायें -
बारी बारी से पहल दोहराएं -
इसे -
भीतर ही से तोड़ गिराए ....
और रिश्तों को पुन: -
उनकी गरिमा
दिलवाएँ....  !

33 comments:

  1. आओ मिलकर -
    अहम् के दायरे में सेंध लगायें -
    बारी बारी से पहल दोहराएं -
    इसे -
    भीतर ही से तोड़ गिराए ....
    और रिश्तों को पुन: -
    उनकी गरिमा
    दिलवाएँ.... !..........फिर तो हर क्षण खुशगवार होगा

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  2. सुन्दर क्षणिकाएं, दायरों में सेंध लगाना बहुत आवश्यक है उनमे नयी ऊर्जा भरने के लिए. बहुत सुन्दर कहा है.

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  3. कबीर की वो पंक्तियाँ फिर से याद आ रही हैं जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है तो मैं नाही

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  4. दोनों क्षणिकाएं एक दूसरे की पूरक ... गहन अभिव्यक्ति

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  5. |
    बेहतरीन आदरेया-

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  6. बहुत सुंदर क्षणिकाएं
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति. हार्दिक बधाई.

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  7. एक उलझन तो दूसरी सुलझाती क्षणिका...
    बहुत सुन्दर सरस जी..

    सादर
    अनु

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  8. रिश्तों को पुन: -
    उनकी गरिमा
    दिलवाएँ.... !
    अनुपम विचार लिये उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

    सादर

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  9. दूसरा वाला बहुत अच्छा।

    जज़्बात के लिए भी समय निकालें।

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  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (19-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  11. aham ke dayre me sendh kya hi sunder bhav hain
    rachana

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  12. लाजबाब,बहुत बेहतरीन क्षणिकाए,,,सरस जी बधाई,,,,

    recent post : बस्तर-बाला,,,

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  13. क्षणिकाएं सचमुच वर्तमान का सुन्दर चित्रण है

    न केवल रिश्तों में वरन संगी साथियों में भी अहम् "अहम्" है

    बधाई .......आभार

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  14. बहुत खूब ... अहम को तोड़ पाना आसान होता तो इंसान बुद्ध हो जाता ...
    पर जिसने तोड़ लिया ... वो जीवन जी गया ...
    लाजवाब क्षणिकाएं ...

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  15. बहुत खूबसूरत बात..अहम में सेंध लगाना जरूरी है

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  16. हर रिश्ते की अपनी ही परिभाषा है ...एक मौन ,एक अहम् दोनों की अभिव्यक्ति है

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  17. आओ मिलकर -
    अहम् के दायरे में सेंध लगायें -
    बारी बारी से पहल दोहराएं -
    इसे -
    भीतर ही से तोड़ गिराए ....
    और रिश्तों को पुन: -
    उनकी गरिमा
    दिलवाएँ

    यदि हम समकोण बनाना चाहते है तो किसी कोण में शेष कोण को मिलाना पड़ेगा यथा 30 में 60 और 60में 30 तब ही अभीष्ट समकोण बनेगा .बस सेंध और अहम् एक दुसरे के पूरक हैं जिनसे जीवन का स्वरुप निर्धारित होता है आपकी रचनाओं से सदा सिखाने को मिलता है सादर नमन

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  18. जब अहम् ख़तम हो जाता है तो बस तू ही तू हो जाता है

    इस भाव को दर्शाती मेरी नयी पोस्ट
    New Post

    Gift- Every Second of My life.

    अपना आशीष इस बेटी को भी दीजिये

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  19. लाजवाब प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  20. बहुत सुंदर अर्थपूर्ण क्षणिकाएँ !
    ~सादर!!!

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  21. यह अहम ही तो हर समस्या की जड़ है. पर इतना आसान भी कहाँ होता है इसमें सेंध लगाना
    बहुत अर्थपूर्ण पंक्तियाँ हैं.

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  22. जब तक अहम् के दायरे में घिरे रहेंगे तब तक रिश्तों की दूरियों को कभी पाटा नहीं जा सकता...बहुत सुन्दर क्षणिकाएं...

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  23. दिनांक 25/01/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  24. आओ मिलकर -
    अहम् के दायरे में सेंध लगायें -
    बारी बारी से पहल दोहराएं -
    इसे -
    भीतर ही से तोड़ गिराए ....

    बहुत सुन्दर ...

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  25. वाह, बेहतरीन रचना

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  26. आओ मिलकर -
    अहम् के दायरे में सेंध लगायें -
    बारी बारी से पहल दोहराएं -
    इसे -
    भीतर ही से तोड़ गिराए ....
    और रिश्तों को पुन: -
    उनकी गरिमा
    दिलवाएँ.... !
    bahut sundar dono rachnayen....aabhar !

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  27. आपको गणतंत्र दिवस पर बधाइयाँ और शुभकामनायें.

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