Friday, March 29, 2013

परिभाषाएं...( ३)




रिश्ते

वह विश्वास !
जो अदम्य है ..
अगाध है ...
अद्भुत है ...
जो उस खिलखिलाते बच्चे में
जिसे आसमान में उछाला है ,
लोकने के लिए ....!!

वह लक्ष्मण रेखा
जो तै करती है सीमाएं
आचरण की ...
व्यवहार की...
और उनसे जुड़े सही गलत की ....

वह बोझ ..!
जिसे कभी चाहकर....
कभी मजबूरी में ...
सहना है
खुशी....
और कड़वाहटओं के बीच...!!

वह सौगातें ...!
जो धरोहर सी....
महफूज़ रखते हैं कभी ..
और कभी...
कूड़े के ढेर पर छोड़ आते हैं ....!!!

नाज़ुक से ...
कभी कांच से ...
रेशम के धागे से कभी ...
पर बला की कूवत 
संजोये रहते हैं ...!!!

31 comments:

  1. नाज़ुक से ...
    कभी कांच से ...
    रेशम के धागे से कभी ...
    पर बला की कूवत
    संजोये रहते हैं ..

    ---------------

    पढ़कर निशब्द हूँ ... टिप्पणी के लिए कोई शब्द आसपास नहीं है ....

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  2. वाह !!! बहुत सुंदर भावों की अभिव्यक्ति,निशब्द करती रचना,

    RECENT POST: होली की हुडदंग ( भाग -२ )

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  3. रिश्तों को पिरोया है आपने फूलों की तरह धागों में ,फिर बांधकर सीमा में सहनशीलता दे दी , धरोहर होते है हमारे नाज़ुक रिश्ते ....
    क्या बात है आपकी प्रस्तुति के क्या कहने

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  4. रिश्ते...
    वो स्पंदन
    जो सीने में एहसास कराता है
    कि आप जिंदा हो...

    बहुत सुन्दर सरस जी....
    सादर
    अनु

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  5. नाज़ुक से ...
    कभी कांच से ...
    रेशम के धागे से कभी ...
    पर बला की कूवत
    संजोये रहते हैं ...!!!
    bahut khoob
    sunder bhav
    rachana

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  6. परिभाषाओं की ये तीसरी कड़ी भी उतनी ही प्यारी.

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  7. रिश्ते जो कभी रिसते हैं तो कभी मरहम से ,बहुत अपने से !

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  8. यही तो है रिश्तों की महिमा

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  9. बहुत सुन्दर....होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
    पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...

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  10. बहुत ही सुन्दर भावों की प्रस्तुति,आभार.

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  11. कल दिनांक 31/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. बहुत सुन्दर परिभाषा में बाँधा है रिश्तों को,,, सरस जी ... सुन्दर प्रस्तुति!

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  13. aap jo paribhashayen gadhti hain, pratyek itni sateek hoti hain, mano yahi uska asli arth hon, aur fir dusri paribhasha padhte hain to lagta hai 'ye bhi sahi hai'....vakai apka nazariya behad sundar, creative aur vyapak hai...........liked it!

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  14. वाह बहुत सुंदर !


    आज की ब्लॉग बुलेटिन क्योंकि सुरक्षित रहने मे ही समझदारी है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  15. वाह बहुत सुंदर !

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  16. सुन्दर विश्लेषण - आधार एक ही सहज विश्वास की डोर हल्का और भारीपन दोनों को साधती है !

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  17. रिश्तों के सधे तारों की मीठी झंकार सी रचना है ,लाजवाब ।

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  18. रिश्तों को अनेक रंगों में उतारती है ये परिभाषाएँ ...
    बहुत लाजवाब होते हैं ये रिश्ते ...

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  19. कितनी सुंदर परिभाषाएं दी हैं आपने रिश्तों की सरस जी ,
    हम रिश्तों को कितनी तरह से अभिव्यक्त करते हैं,आपने बहुत
    खूबसूरती से शब्दों में उतारा है.....
    साभार.....

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  20. बहुत सुन्दर परिभाषा रिश्तों की .......

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  21. परतों को उघारती हुई ये परिभाषाएं अच्छी बन पड़ी है..

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  22. bahut khoob sunder bimbon ke sath sunder kavita
    rachana

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  23. सुन्दर परिभाषाएं......अच्छी चल रही है सीरिज.....शुभकामनायें।

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  24. वह विश्वास !
    जो अदम्य है ..
    अगाध है ...
    अद्भुत है ...
    जो उस खिलखिलाते बच्चे में
    जिसे आसमान में उछाला है ,
    लोकने के लिए ....!!
    बहुत खूब ....

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  25. चाहकर....
    कभी मजबूरी में ...
    सहना है
    खुशी....
    और कड़वाहटओं के बीच...!!
    bahut hi sundar aur prabhavshali paribhasha ki prastuti lajbab lagi .....sadar aabhar

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  26. सभी परिभाषाएं सटीक. ये मेरे मन के ज्यादा करीब...

    वह लक्ष्मण रेखा
    जो तै करती है सीमाएं
    आचरण की ...
    व्यवहार की...
    और उनसे जुड़े सही गलत की ....

    शुभकामनाएँ.

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  27. वह बोझ ..!
    जिसे कभी चाहकर....
    कभी मजबूरी में ...
    सहना है
    खुशी....
    और कड़वाहटओं के बीच...!!

    रिश्ते भी तो बोझ बन जाते हैं ... सटीक अभिव्यक्ति

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