Monday, August 12, 2013

क्षणिकाएं - (५)



बे वजूद रिश्ते

न जाने कितने रिश्ते
अनाम रह जाते हैं
जीते हैं...बिना वजूद के
यादों में-
टंगे रहते हैं दीवारों पर , तस्वीरों की भीड़ में -
मरते नहीं कभी
न कभी ख़त्म होते हैं
बस , कभी कभी
किसी आह....
किसी सिसकी.....
या कोरों में ठिठकी
नमी में सांस ले लेते हैं
यदा कदा ..!!!!

किरचें

अभी अभी कुछ दरका
पर आवाज़ नहीं हुई
मैंने टुकड़े बुहार दिए
लेकिन कुछ किरचें
दरारों..
अनदेखे कोनों में छिपी रह गयीं -
जो अचक्के में भेदकर
लहू लुहान कर गयीं
भीतर तक..!!!!

19 comments:

  1. रिश्ते और किरचे से हमेशा सावधानी रखने की जरुरत है
    latest post नेता उवाच !!!
    latest post नेताजी सुनिए !!!

    ReplyDelete
  2. बहुत ही उम्दा क्षणिकाए ,,,बधाई

    RECENT POST : जिन्दगी.

    ReplyDelete
  3. खूबसूरत क्षणिकाएं ... बधाई !!

    ReplyDelete
  4. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 14/08/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  5. रिश्ता है तो कोई तो नाम भी होगा .... ...यादों में हैं ,तो वजूद तो है ही .....हाँ यादें ज़रूर आँख नाम कर जातीं हैं यदा कदा......ये जीवन है .....बहुत सुंदर लिखा है सरस जी ...........!!
    किरचों का दर्द जैसे महसूस हो रहा है ........बहुत गहन अभिव्यक्ति ...!!

    ReplyDelete
  6. bahut hi shandaar baat.............kircho sy dard to hota hi hai............

    ReplyDelete
  7. यादें रहती हैं आसपास ... रिश्ते सांस लेते हैं ...
    और किरचें लहुलुहान करने पर भी चुभी रहती हैं उम्र भर ....

    ReplyDelete
  8. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (14 -08-2013) के चर्चा मंच -1337 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ है !

    ReplyDelete
  10. वाह बहुत बढ़िया । गहन, सुन्दर , शानदार |

    ReplyDelete
  11. मन की गहरी सतहों में क्या-क्या छिपा है कौन जाने !

    ReplyDelete
  12. आह....चुभा कुछ..मगर अच्‍छा लगा

    ReplyDelete
  13. बेवजूद रिश्ते और किरचे सदा कसकते हैं आपने ज़िन्दगी को करीब से महसूस किया है

    ReplyDelete
  14. रिश्तों और किरचो की चुबन ....भावुक अहसास !

    ReplyDelete
  15. बुहारने के बाद भी रह ही जाती हैं किरचें ... बहुत भावप्रवण क्षणिका ...

    ReplyDelete