Monday, March 3, 2014

शापित



सूरज उससे अनभिज्ञ है
किरणें अनजान !
ख़ौफ़ज़दा रहती है वह
शाम के धुंधलके से -
और रात लाती है फरमान !
चल तेरे मरना का वक़्त आ गया

बंद कर देती  है सारी
ख्वाइशें , सपने , यादें
और रख देती है वह संदूकची
उसी आले पर .....
जड़ लेती है चेहरे पर हंसी -
पोत लेती है रंग रोगन -
और बन जाती है नुमाइश ...

हसरतों पर कोई पाबंदी नहीं
जितना चाहे चुग्गा डाल दे
घेरे रहती हैं उसे -
पर पालती नहीं उन्हें
लहू लुहान होने के डर से
और नामुराद आंसू-
मूँह छिपाये फिरते हैं

हंसी उसका वस्त्र है
और उपहास उसकी नियति
और रिश्ते....!
एक मृगमरीचिका -
जिसमें केवल आस है
यहाँ लोग रिश्ते कायम तो करते हैं
निभाते नहीं
सदियों से ब्रह्मकमल सी खिलती आयी है
सुबह होते ही ...मुरझा जाने के लिए ....


20 comments:

  1. हंसी उसका वस्त्र है
    और उपहास उसकी नियति
    और रिश्ते....!
    एक मृगमरीचिका -
    जिसमें केवल आस है
    यहाँ लोग रिश्ते कायम तो करते हैं
    निभाते नहीं
    सदियों से ब्रह्मकमल सी खिलती आयी है
    सुबह होते ही ...मुरझा जाने के लिए ...
    bahut khoob
    rachana

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  2. जड़ लेती है चेहरे पर हंसी -
    पोत लेती है रंग रोगन -
    और बन जाती है नुमाइश ...
    aapne baut umda likha sarasji...

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  3. हसरतों का खत्म होना .. जीवन की भी शाम है ... आंसू तो आते जाते हैं ...

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  4. हसरतों पर कोई पाबंदी नहीं
    जितना चाहे चुग्गा डाल दे
    घेरे रहती हैं उसे -
    पर पालती नहीं उन्हें
    लहू लुहान होने के डर से
    और नामुराद आंसू-
    मूँह छिपाये फिरते हैं...
    बहुत सुन्दर दी...बहुत कोमल...

    सादर
    अनु

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  6. बहुत ही सुन्दर एवं भावपूर्ण
    KAVYASUDHA ( काव्यसुधा )

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन लक्ष्मी के साहस और जज़्बे को नमन - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आपका हार्दिक आभार

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  8. एक औरत के दर्द को समेटे बोलती सी पोस्ट |

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  9. हसरतों पर कोई पाबंदी नहीं
    जितना चाहे चुग्गा डाल दे
    घेरे रहती हैं उसे -
    पर पालती नहीं उन्हें
    लहू लुहान होने के डर से
    और नामुराद आंसू-
    मूँह छिपाये फिरते हैं...बहुत सुंदर अभि‍व्‍यक्‍ति‍

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  10. एक कड़वे सच को बहुत ही सुंदरता से शब्द रूप देकर लिख दिया आपने दी ...बहुत ही सुंदर एवं सार्थक अभिव्यक्ति।
    सादर

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  11. उसका सच , उसकी हंसी का सच और उसके आंसू का सच ...सब सच सच ...

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  12. प्रभावकारी प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

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  13. प्रभावकारी प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

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  14. हमारे समाज की यह भी एक कड़वी सच्चाई है
    जब की आज हम महिला दिवस मना रहे है !
    सटीक रचना है !

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  15. फिर भी कमल की अपनी जिद है ...

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  16. नारी जीवन को शब्दों में तराशने की बेहतरीन कोशिश.................बधाई.........................

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  17. यहाँ लोग रिश्ते कायम तो करते हैं
    निभाते नहीं
    सदियों से ब्रह्मकमल सी खिलती आयी है
    सुबह होते ही ...मुरझा जाने के लिए ....

    ...मन को छूते गहन अहसास...बहुत प्रभावी और मर्मस्पर्शी रचना...

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  18. हसरतों पर कोई पाबंदी नहीं
    जितना चाहे चुग्गा डाल दे
    घेरे रहती हैं उसे -
    पर पालती नहीं उन्हें
    लहू लुहान होने के डर से
    और नामुराद आंसू-
    मूँह छिपाये फिरते हैं.......बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

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  19. उस शापित से ही शायद कभी शापमुक्त हो पाओ जिससे रिश्ते तो बनाते हो पर निभाते नहीं .... गहन अभिव्यक्ति

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