Friday, July 19, 2013

सृजन



सृजन करती हूँ
जब भी किसी कविता का -
खोजती हूँ उसे भीतर-
टटोलती हूँ यादों को -
कुछ लम्हों को-
कुछ मिठास -
कुछ कड़वाहटों  को -
कुछ झकझोर देने वाले अहसासों को -
और पाती हूँ एक कविता
दुबकी हुई ..किसी कोने में
उसे सजा संवारकर
एक नया रूप , एक नई पहचान देती हूँ
और देखती हूँ उसे फलता फूलता ...!!!!

28 comments:

  1. Kitni saraltase aapne apni rachanaki upaj bata dee!

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  2. हमारे अहसास ही रचनाएं हैं ...

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  3. कुछ लम्हे याद बन जाते हैं,
    कुछ यादें अहसास बन जाती हैं...
    इनसे जुड़े जज़्बात... दिल की आवाज़ बन जाते है...
    और दिल की आवाज़ जो बहती काग़ज़ पर....
    कविता बन जाती है... :-)
    ~सुंदर अभिव्यक्ति भाभी!:)

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  4. अनुभूत सत्य ही सृजन की सम्भावना होते हैं...!

    फलती फूलती रहे कविता!

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  5. सुंदर अहसास ,सुंदर अभिव्यक्ति

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  6. शब्द और भाव एहसाह से भर जाएँ ...सज संवार जाएँ तो बन जाये सुंदर कविता .......!!सुंदर सृजन सरस जी ....

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  7. यही मीठी खट्टी यादें सृजन करवा देती हैं .... सुंदर रचना

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  8. साधुवाद योग्य लाजवाब अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई

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  9. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अमर शहीद मंगल पाण्डेय जी की 186 वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  10. और मिल जाती है ...यादों की प्यारी सौगात !
    शुभकामनायें!

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  11. आपकी यह रचना कल शनिवार (20-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  12. फलता फूलता और महकता.....
    बहुत प्यारा सृजन

    सादर
    अनु

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  13. सृजन की-- सार्थक,सुंदर परिभाषा गढ़ी है आपने
    सादर

    आग्रह है
    केक्ट्स में तभी तो खिलेंगे--------

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  14. अपने भीतर से जो कोमल अहसास निकलती है वही सृजन है बहुत सुंदर ....

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  15. यूँ ही चलता रहे आपका सृजन अविरत. बहुत भावभीनी कवितायें होती हैं आपकी.

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  16. बहुत ही सुन्दर रचना..
    सृजन का सुन्दर अहसास..
    :-)

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  17. सच यही उद्गम है कविता का........सुन्दर।

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  18. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (21 -07-2013) के चर्चा मंच -1313 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  19. खुबसूरत भावो की अभिवय्क्ति…।

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  20. बहुत सुंदर ... बहुत सार्थक रचना ... हार्दिक बधाई ...

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  21. इसी तरह फलती फूलती है कवितायेँ सृजित भी !
    क्या संयोग है अभी ही अजन्मी रह जाने वाली कविताओं का पक्ष भी पढ़ा !

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  22. सार्थक और भावप्रणव प्रस्तुति!

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  23. शब्द और रचना का उदय मन के भीतर कहीं गहरे में ही छिपा होता है ...
    इस को खुद ही सृजित करना होता है ...

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  24. एक बच्चे की तरह होती है कविता, सही रूप देने के लिए गहरी संवेदनशीलता जरूरी होती है जो सबमें नहीं होती इसलिए हर व्यक्ति कवि नहीं हो पाता। जो हैं उनका सौभाग्य है।

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  25. दीदी कविता में शब्दों के साथ साथ सोच का तालमेल ही उसे अलग बनाता है ..आभार इतनी अच्छी कविता के लिए

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