Monday, June 24, 2013

हथेलियाँ





यह हथेलियाँ...सच्ची हमदर्द होती हैं
बिना कहे हर बात जान लेती हैं
हर आह...हर सिसकी घुल जाती है इन लकीरों में
जब थके चेहरे को ...वजूद से अपने ढाँप लेती हैं -

दुखते रहते जब थकी पलकों के फाये हैं -
नर्म गदेलियों से हर दर्द वह सोख लेती हैं -
दर्द हजारों जो पपोटों में छिपे बैठे हैं -
उन्हें टूटकर बहने को ज़मीं देती हैं -

जग की रुसवाइयां  जब हद से गुज़र जाती हैं
हिचकियों को वह आँचल में भींच लेती हैं
या परास्त, थकी किस्मत की लकीरों को
फिरसे सहलाकर ..जीने की दिशा देती हैं-

सिर्फ ऐसा नहीं की दुःख ही वह साझा करतीं
हर ख़ुशी में भी साथ देती हैं
शर्म से लाल हो गए गालों को
मोहब्बत भरी आगोश में पनाह देती हैं ...!!!!

21 comments:

  1. हथेली और उनकी लकीरें बहुत कुछ कहती हैं , कितनी सहजता से इसके साथ को आपने दर्शाया है ... .... सुंदर रचना ।

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    1. बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
      सादर...!
      शशि पुरवार

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  2. दर्द हजारों जो पपोटों में छिपे बैठे हैं -
    उन्हें टूटकर बहने को ज़मीं देती हैं -

    sundar bhaav ...dard bhi aur khushi ke bhii ...

    शर्म से लाल हो गए गालों को
    मोहब्बत भरी आगोश में पनाह देती हैं ...!!!!
    bahut sundar rachna saras ji ...

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  3. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

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  4. बहुत ही सुन्दर रचना..
    बेहतरीन....
    :-)

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  5. सच में सच्ची हमदर्द होती है, हथेलियाँ...बहुत सुन्दर कविता

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  6. Behad sundar bhav!Mere bhi blogpe zaroor yayen!

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  7. हथेलियाँ संबल भी समेटे हैं और प्रेम भी
    बहुत खूबसूरत.

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  8. हथेलियाँ ही हाथों-हाथ रखती हैं, ज़िन्दगी की हरेक बात रखती हैं !

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  9. यह हथेलियाँ...सच्ची हमदर्द होती हैं
    बिना कहे हर बात जान लेती हैं
    हर आह...हर सिसकी घुल जाती है इन लकीरों में
    जब थके चेहरे को ...वजूद से अपने ढाँप लेती हैं -

    ....बिल्कुल सच..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  10. बहुत खूब ... येहठेलियाँ कितना कुछ साझा कर लेती हैं ...
    उम्दा प्रस्तुति ...

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  11. सिर्फ ऐसा नहीं की दुःख ही वह साझा करतीं
    हर ख़ुशी में भी साथ देती हैं
    शर्म से लाल हो गए गालों को
    मोहब्बत भरी आगोश में पनाह देती हैं
    आपने ज़िन्दगी को समेट दिया हथेली की लकीरों में और सार्थकता दे दी जीवन को नए रंगों से भर दिया प्रेरक पोस्ट के लिए बधाई

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  12. शर्म से लाल हो गए गालों को
    मोहब्बत भरी आगोश में पनाह देती हैं!

    मोहब्बत बहुत हौसला देती है. हथेलियाँ उस मोहब्बत का पैगाम प्रेषित करने का जरिया बनती है.

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  13. बहुत सुन्दर भाव ...
    हथेलियाँ एक हमसफ़र के रूप में हर दफे साथ देती है....

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  14. वाह.सुन्दर प्रभावशाली ,भावपूर्ण .बहुत बहुत बधाई...

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  15. वाकई में ...
    मंगलकामनाएं !

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  16. खूबसूरत अंदाजे बयाँ

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