आज भी याद है मझे वह दिन -
जब मेरी कल्पना को एक रूप मिला था ....तुम्हारे रूप में -
जब पहली बार नर्स ने तुम्हे मेरे पास लिटाया था -
एक अनोखे उत्साहने घेर लिया था तब -
यह मेरे ही शरीर का हिस्सा है ...मुझसे बना , मेरा अंश !
जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था .
तुम बगल में लेटीं, इस नई दुनिया को निहार रही थीं
'आहा..आहा '
यह स्वर तुम्हारे कंठ से -किसी घुंघरू की खनक से लग रहे थे
वह पल-
वहीँ ठहर गया-
एक तस्वीर की तरह जड़ गया..
२३ साल बीत गए -
कुछ ही महीनों में तुम्हारा विवाह है .
इन गुज़रे सालों में तुम , मेरा हिस्सा थीं ...
जैसे किसी पेंटिंग में बक ग्राउंड - जिसके बिना पेंटिंग अधूरी है
और होती भी क्यों नहीं ....
तुम मेरे ही बताये रंग पहचानती थीं -
मेरे ही बताये रंग भरती थीं ...
फिर एक दिन मैंने कुछ नए रंग देखे -
वे रंग जो मैंने तुम्हे नहीं दिखाए थे-
धीरे धीरे वही रंग तुम्हारी ज़िन्दगी बन गए
मेरे रंग धुंधले.....
जिन्हें देखकर तुम बड़ी हुई थीं .
उन रंगों का धुंधला होना , तुमसे देखा नहीं गया-
तुम्हे वे भी प्रिय थे , जैसे मैं थी .
तुमने आहिस्ता आहिस्ता उन रंगों में अपनी छठा मिलाकर , दोबारा रंग दिया
ब्रश के हर स्ट्रोक के साथ मुझे अहसास होता गया ...की रंग बिलकुल बदल चुके हैं -
-शायद यही जीवन का सच है -
बच्ची मेरी -
मैं तो चाहूंगी तुम हमेशा खुश रहो -
तुम्हारा जीवन साथी तुम्हे इतना प्यार दे -
की तुम्हे -
माँ के बताये रंग न ढूँढने पड़ें .
जीवन में नयी नयी तसवीरें बनाओ -
उनमें नए रंग भरो-
और फिर जब अपने बगल में एक प्यारिसी नन्हीसी जान को देखकर भरमाओ-
तो उसे उसे भी उन रंगों से मिलाओ -
जो तुम्हारा सच हैं ....
और हमें इस सच को स्वीकारना है . जब जब बच्चों के जीवन में कोई नया प्रवेश करता है, तो वही सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है. तब हमारी बातें, हमारे संस्कार ,हमारे विचार कम महत्वपूर्ण हो जाते हैं. लेकिन फिर ...हम बच्चों की ख़ुशी की दुहाई देकर संतोष कर लेते हैं .

